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केन्द्र सरकार ने अपनी अगुवाई में शैक्षिक नीतियों एवं कार्यक्रम बनाने और उनके क्रियान्वयन पर नजर रखने के कार्य को जारी रखो है । इन नीतियों में सन् 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (छक् 1986 ) तथा कार्यवाही कार्यक्रम (छच1986) शामिल है । जिसके अन्तर्गत
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शिक्षा में एकरूपता लाने, प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम को जन आदोलन बनाने, शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने, बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने, बालिका शिक्षा पर जोर देने व व्यवसायपरक शिक्षा पर जोर दिया गया । इसके साथ ही सी ए बी ई की तीन स्थायी समितियां बनाये जाने का निर्णय किया गया है1. नई शिक्षा नीति को लागू कराने की विशेष आवश्यकता सहित बच्चों एवं युवाओं के
लिए शिक्षा हेतु स्थायी समिति । 2. प्रौढ़ शिक्षा व राष्ट्रीय साक्षरता मिशन को निर्देश देने के लिए स्थायी समिति ।। 3. बच्चों को शिक्षा, बाल विकास, पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न योजनाओं को ध्यान
में रखते हुए बाल विकास प्रयासों के समन्वय और एकीकरण मामलों के लिए एक स्थायी समिति ।
शिक्षा सेवाओं के तहत भारतीय संशोधित प्रस्तावों में उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए कई शर्ते रखी गई है | इनके अनुसार उच्च शिक्षा संस्थानों को सक्षम अधिकार के माध्यम से शुल्क निर्धारित करने की अनुमति है ।
1986 में जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति की घोषणा हुई तो उसमें यह कहा गया था कि हमारा लक्ष्य है – सभी के लिये शिक्षा । हमारी शिक्षा वर्तमान एवं भविष्य के निर्माण के लिये एक अद्वितीय पूंजी निवेश है । इसके बाद में 1992 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर पुनर्विचार किया गया और यह कहा गया कि इसमें सुधार होना चाहिए और उसके अनुसार कुछ नये सुझाव देकर संशोधित राष्ट्रीय नीति, 1992 को आचार्य राममूर्ति कमेटी के प्रतिवेदन के अनुसार बनाया गया । उसमें यह कहा गया कि शिक्षा का लक्ष्य अहिंसात्मक तथा शोषणमुक्त सामाजिक तथा आर्थिक रूप से व्यवस्था करना है | भारत की शिक्षा नीति की कुछ मूलभूत कमियों को दर्शाया गया है1. देश में आर्थिक असमानताओं का प्रभाव शिक्षा पर भी दृष्टिगोचर हो रहा है | आज शिक्षा एक व्यवसाय बनकर रह गया है और निजीकरण ने शैक्षिक अवसरों की समानता
के अधिकार को साधारण बालक से छीन लिया है ।। 2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा, शैक्षिक नियोजन एवं प्रबन्ध प्रणाली में परिवर्तन कर
उच्च प्राथमिकता देने का प्रस्ताव रखा गया है लेकिन प्रबन्ध प्रणाली में भ्रष्टाचार व अकर्मण्यता बढ़ गयी है । शिक्षा संस्थाओं के चलाने वालों की शोषण प्रवृत्ति और
भ्रष्टाचार नीतियों पर कोई नियंत्रण नहीं है । 3. शिक्षा नीति में शाश्वत मूल्यों के विकास को केवल सैद्धान्तिक रूप में ही स्वीकारा गया
है, कोई प्रभावी कार्य नहीं किया गया । 4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति का यह दावा रहा है कि सभी के लिए शिक्षा उपलब्ध हो ।
(Education for all) लेकिन अभी भी लाखों बालक-बालिकाएँ स्कूल से वंचित है । 5. 2006-07 में भारत सरकार सेम पिट्रोडा की अध्यक्षता में बने राष्ट्रीय ज्ञान आयोग
(छंजपवदंस ज्ञदवूरसमकहम बउउपेपवद) ने यह सिफारिश की है कि भारत में 7500 से अधिक विश्वविद्यालय होने चाहिए | इतने वर्षों के पश्चात शिक्षा नीति की यह आलोचना है कि विश्वविद्यालयी शिक्षा का स्तर निरन्तर गिरता जा रहा है ।
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6. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार टी. वी., सिनेमा, रेडियो, जनसंचार के साधन शिक्षा
और मानवीय मूल्यों का विकास करने में बहुत अधिक उपयोगी हो सकेंगे, लेकिन आज अश्लीलता व अनैतिकता के पर्याय के रूप में ये सभी जनसंचार साधन स्थापित हो चुके
हैं । 7. स्कूलों में मिड-डे-मील के नाम पर खराब भोजन दिया जा रहा है । 8. शिक्षा वर्ग भेद, सामाजिक असंतोष, भ्रष्टाचार, क्षेत्रीयवाद और साम्प्रदायिकता को रोकने
में सक्षम नहीं हो पा रही है । 17.7 मूल्यांकन प्रश्न
1. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 की कौन कौन सी सिफारिशें सराहनीय है और क्यों? 2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आधार मानकर भारत में शिक्षा का प्रसार किस प्रकार हो पाया
3. संशोधित राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1992 प्रतिवेदन क्या है? समझाये ।। 4. पाठ्यक्रम तथा प्रक्रिया का अभिनवीकरण के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने क्या कार्य
किये हैं? 5. 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार तकनीकी व प्रबन्ध शिक्षा का क्या प्रावधान
6. राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने खुला विश्वविद्यालय व दूरस्थ अधिगम के लिए क्या कार्य
किये? 17.8 सन्दर्भ ग्रन्थ
1. प्रो0 रूहेला, सत्यपाल | : नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2008, तरूण प्रकाशन 2. डॉ0 बायती जमना लाल | : शिक्षा प्रशासन एवं प्रबन्ध के आधुनिक सिद्धान्त.
2005 तरूण प्रकाशन 3. डॉ0 बाघेला, एच.एस.
शैक्षिक प्रबन्ध व विद्यालय संगठन, 2006 तरूण
प्रकाशन
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इकाई 18 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग एवं शिक्षा का अधिकार अधिनियम (National knowledge Commission And Right to
Education Act) इकाई की रूपरेखा 18.0 उद्देश्य 18.1 प्रस्तावना 18.2 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की परिकल्पना
18.2.1 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के उद्देश्य 18.2.2 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का गठन 18.2.3 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की प्रमुख सिफारिशें 18.2.4 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशों पर अनुवर्ती कार्यवाही
18.2.5 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग: राज्य स्तरीय पहले 18.3 शिक्षा का अधिकार अधिनियम
18.3.1 शिक्षा का अधिकार का अर्थ 18.3.2 अधिनियम बनने व लागू होने की प्रक्रिया 18.3.3 शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ 18.3.4 सरकार के उत्तर दायित्व 18.3.5 वित्तीय स्रोत । 18.3.6 विद्यालयों हेतु मानदण्ड एवं मानक 18.3.7 विद्यालयों के उत्तरदायित्व 18.3.8 शिक्षा के अधिकार अधिनियम के संरक्षण प्रावधान 18.3.9 शिक्षा के अधिकार अधिनियम की बाधाएँ 18.3.10 सफल क्रियान्वयन हेतु प्रयास
सारांश 18.5 शब्दावली 18.6 मूल्यांकन प्रश्न 18.7 संदर्भ ग्रंथ
18.4
18.0 उद्देश्य ।
इस इकाई को पढ़ने के बाद आप – • राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की परिकल्पना को समझ सकेंगे ।
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• राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की स्थापना के उद्देश्यों का विवेचन कर सकेंगे । • राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की आवश्यकता को समझ सकेगें ।।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की संरचना, प्रविधियों व कार्यों का विवेचन कर सकेंगे । राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के क्षेत्र पंचभुज” को समझ सकेंगे। राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के विषय तथा उनके महत्व का निर्धारण कर सकेंगे राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की रिपोर्ट के प्रमुख तथ्यों की तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे ।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की प्रमुख सिफारिशों का तुलनात्मक अध्ययन कर सकेंगे । • राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशों की क्रियान्विति के बारे में अनुमान लगा सकेंगे । • राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के प्रभावों का विश्लेषण कर सकेंगे ।
| राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की जानकारियों के आधार पर छात्रों का मार्ग निर्देशित कर सकेंगे। • शिक्षा के अधिकार की आवश्यकता एवं महत्व को समझ सकेंगे ।

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