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7397 करोड़ रूपये व्यय का प्रस्ताव है । (8) ई अभिशासन (E-Goverance) पर राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिश का सरकार
द्वारा समर्थन किया गया है । 18.2.5 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग राज्य स्तरीय पहले
ऐसे अनेक विषय जिस पर राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की हैं। राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकार के अधीन आते हैं । अधिकांश सिफारिशों का क्रियान्वयन राज्य और जिला स्तरों पर किया जाना है । इस बात को ध्यान में रखते हुए ज्ञान आयोग राज्य स्तर पर ज्ञान पहलों को तैयार करने के लिए अनेक राज्य सरकारों के संपर्क में रहा है | अपनी सिफारिशों के कार्यान्वयन के लिए आयोग 26 राज्यों और 3 संघशासित क्षेत्रों के साथ काम कर रहा है । प्रमुख पहलों में निम्न शामिल हैं :- सभी राज्यों ने एनकेसी की सिफारिशें कार्यान्वित करने के लिए नोडल अधिकारियों और विभागों की नियुक्ति कर दी है । अनेक राज्य सरकारें ज्ञान आयोग की सिफारिशों पर आधारित सुधारों के लिए कार्य योजनाएं तैयार कर रही हैं जिनमें ये शामिल हैं: राजस्थान, उड़ीसा तथा आँन्ध्र प्रदेश । दिल्ली सरकार ने ज्ञान आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के लिए कार्ययोजना पहले ही मंजूर कर दी है। अनेक राज्य विश्वविद्यालयों पर कॉलेजों के संबंधन के भार को कम करने के लिए स्टेट बोर्ड ऑफ अंडर ग्रेजुएट एजूकेशन स्थापित करने का जायजा ले रहे हैं । इन बोर्डो का उद्देश्य शैक्षणिक कार्यों को प्रशासनिक कार्यों से अलग करने और गुणवत्ता बेंचमार्क उपलब्ध कराना है ।
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कर्नाटक ने राज्य में ज्ञान क्षेत्र में सुधार के लिए बुनियादी कार्य करने के वास्ते एक ज्ञान आयोग शुरू कर दिया है । राजस्थान ने प्रक्रिया सुधार और ज्ञान आपूर्ति के लिए आईटी शिक्षा को बढ़ावा देने तथा आईटी प्रणालियों के अनुप्रयोग के वास्ते राजस्थान नालेज कार्पोरेशन लिमिटेड की स्थापना की है । राष्ट्रीय ई-अभिशासन परियोजना (एनईजीपी) के एक अंग के रूप में 6 राज्य सरकारों अर्थात हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडू, चंडीगढ़, दिल्ली तथा त्रिपुरा ने स्टेट वाइड
एरिया नेटवर्क कार्यान्वित किया है और 18 राज्यों में इसका कार्यान्वयन प्रगति पर है। 18.3 शिक्षा का अधिकार अधिनियम 18.3.1 शिक्षा का अधिकार का अर्थ
भारत के 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बालक को निःशुल्क व अनिवार्य रूप से प्राथमिक शिक्षा का अधिकार प्राप्त है ।।
• निःशुल्क शिक्षा:- से तात्पर्य किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राशि का नहीं लिया जाना | स्कूल फीस, एडमीशन फीस, यूनीफार्म, पाठ्य पुस्तकें, मिड डे मील, परिवहन आदि से सम्बन्धित किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जायेगा |
• अनिवार्य शिक्षा:- से अर्थ देश के सभी बालकों के लिये शिक्षा उपलब्धता व सर्वसुलभता। 6 वर्ष से 14 वर्ष तक बालक अपने पड़ोस के किसी भी प्रकार (सरकारी अनुदानित, निजी, स्वायत्तशाषी) के विद्यालय में प्रवेश लेकर प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं । कम से कम प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर अनिवार्य रूप से सभी बालकों को मिले जिससे कि देश का प्रत्येक नागरिक शिक्षित हो सके । शिक्षा के समान अवसर देश के सभी बालकों को प्राप्त हो सकें ।
• प्रारंभिक शिक्षा:- कक्षा प्रथम से कक्षा आठ तक की शिक्षा । • बालक (Child) 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के लड़के व लड़कियाँ ।
विद्यालय (School):- मान्यता प्राप्त राजकीय, स्थानीय, अनुदानित, गैर अनुदानित, निजी विदयालय | • विशेषीकृत श्रेणी “विद्यालय” केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल । 18.3.2 अधिनियम बनने व लागू होने की प्रक्रिया
शिक्षा के अधिकार का स्वप्न हमारे संविधान निर्माताओं द्वारा देखा गया था जो भारत को एक प्रभुत्व सम्पन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य के साथ-साथ एक विकसित व सुशिक्षित राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे । इसके लिये हमारे संविधान के अध्याय चार में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में राज्य के दायित्व स्पष्ट करते हुए राज्य द्वारा अपने नागरिकों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने सम्बन्धी लक्ष्य निर्देशित किया गया । इन्हीं लक्ष्यों में शिक्षा के अधिकार की भावना परिलक्षित होती है । इस स्वप्न का लक्ष्य व प्राप्ति देश की स्वतंत्रता के साठवें वर्ष में हुई । शिक्षा के अधिकार हेतु प्रयास इस प्रकार रहे
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शिक्षा के अधिकार को संवैधानिक आधार प्रदान करने के लिये दिसम्बर 2002 में 86 वां संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 21 A (भाग-iii) जोड़ा गया जिसके अन्तर्गत शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया ।
इस अधिनियम सम्बन्धी कच्चा दस्तावेज सर्वप्रथम 2005 में तैयार किया गया । – प्रारम्भ में अलाभान्वित व शिक्षा से वंचित रह रहे गरीब बालकों हेतु निजी विद्यालयों
में 25% आरक्षण प्रदान किया गया । – केन्द्रीय शैक्षिक परामर्श बोर्ड गठित किया गया जो इस अधिनियम का स्वरूप निर्धारित
कर सके व इसे लोकतांत्रिक समाज हेतु वास्तविक एवं व्यावहारिक रूप प्रदान कर सके। भारतीय विधि आयोग ने निजी विद्यालयों में अलाभान्वित बालकों हेतु 50% आरक्षण का सुझाव दिया । जुलाई 2005 में केन्द्रीय शैक्षिक परामर्श बोर्ड (Central Advisory Board of Education) ने यह अधिनियम पूर्ण रूप से तैयार करके मानवीय संसाधन एवं विकास मंत्रालय को प्रस्तुत किया । मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा यह विधेयक राष्ट्रीय परामर्श परिषद् (National
Advisory Council) को भेजा गया । इसकी अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी हैं । – राष्ट्रीय परामर्श परिषद के दवारा यह विधेयक प्रधानमंत्री के अवलोकन हेतु भेजा गया । – 19 जुलाई 2006 को शिक्षा के अधिकार से जुड़े सभी संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई
गई जिसमें संसदीय कार्यवाही व निर्देशों की आवश्यकता व निर्धारण हेतु निर्णय लिये
गये।
2 जुलाई 2009 को यह विधेयक केन्द्रीय मंत्रीमण्डल (Cabinet) द्वारा अनुमोदित कर
दिया गया । – 20 जुलाई 2009 को राज्यसभा द्वारा इसे पारित कर दिया गया । – 4 अगस्त 2009 को लोकसभा द्वारा भी इसे पारित कर दिया गया । – 3 सितम्बर 2009 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात यह अधिनियम बन गया । – 1 अप्रेल 2010 को यह अधिनियम जग व कश्मीर राज्य को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में
लागू हो गया । भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि “शिक्षा का अधिकार अधिनियम” संसद में प्रधानमंत्री के भाषण द्वारा लाया गया । प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में कहा | We are committed to ensuring that all children, irrespective of gender and social category, have access to education. An education that enables them to acquire the skills, knowledge, values and attitudes necessary to become responsible and active citizens of India,”
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“शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारत में लागू होने के पश्चात भारत विश्व के उन 135 देशों में सम्मिलित हो गया है जिनमें शिक्षा के अधिकार को मूल अधिकार
के रूप में मान्यता दी गई है । 18.3.3 शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ
बच्चों के लिए मुफ्त तथा अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ

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